हज़रत तमीम दारी رضي الله عنه बयान करते हैं:
“मैं और मेरे कुछ साथी
अरब से मशरिक़ (पूर्व) की तरफ़ सफ़र पर निकले।
अचानक समुद्र में तेज़ हवाएँ चलने लगीं,
मौसम बिगड़ गया,
और हमारी कश्ती भटक गई।”
लगभग एक महीने तक वे समुद्र में इधर-उधर भटकते रहे।
आख़िरकार समुद्र उन्हें
एक अनजाने टापू (Island) के पास ले आया।